नई दिल्ली: दिल्ली में नाबालिग लड़की के साथ चलती बस में कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, बस की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। जांच में पता चला है कि जिस निजी स्लीपर बस में कथित वारदात हुई, उसके खिलाफ पहले से 11 यातायात चालान दर्ज थे। इनमें से सात चालान अकेले जुलाई महीने में जारी किए गए थे।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बस में लगा सीसीटीवी सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इसके अलावा बस की खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगे थे, जिससे बाहर से अंदर का दृश्य आसानी से दिखाई नहीं देता था। अधिकारियों के अनुसार यह व्यवस्था सुरक्षा नियमों को लेकर सवाल खड़े करती है।
बस पर पहले से थे 11 चालान
दिल्ली बस दुष्कर्म मामला सामने आने के बाद जांच एजेंसियों ने बस से जुड़े दस्तावेजों और उसके पिछले यातायात रिकॉर्ड की भी जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि बस पर कुल 11 चालान थे। इनमें तेज गति से वाहन चलाने और परमिट से जुड़े उल्लंघन जैसे मामले शामिल थे। इनमें से सात चालान जुलाई में ही किए गए थे।
अब जांच का एक अहम सवाल यह है कि इतने चालान होने के बावजूद बस को सड़क पर चलने की अनुमति कैसे मिलती रही और संबंधित विभागों की ओर से इसकी निगरानी क्यों नहीं की गई।
बस में काम नहीं कर रहा था सीसीटीवी
वाणिज्यिक यात्री वाहनों में यात्रियों की सुरक्षा के लिए निगरानी व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जाता है। जांच में सामने आया कि इस बस का सीसीटीवी सिस्टम काम करता हुआ नहीं मिला।
2012 के निर्भया मामले के बाद सार्वजनिक और वाणिज्यिक यात्री वाहनों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया था। ऐसे में बस में खराब सीसीटीवी का पाया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बस में वाहन की स्थिति पर नजर रखने वाली दूसरी सुरक्षा व्यवस्थाएं, जैसे वाहन निगरानी प्रणाली और आपातकालीन बटन, मौजूद थे या नहीं।
खिड़कियों पर लगे थे मोटे पर्दे
जांच में बस की खिड़कियों पर मोटे पर्दे लगे होने की बात भी सामने आई है। अधिकारियों के मुताबिक इन पर्दों की वजह से बस के अंदर का हिस्सा बाहर से दिखाई देना मुश्किल था।
सार्वजनिक यात्री वाहनों में बाहरी निगरानी और यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से यह व्यवस्था चिंता का विषय मानी जा रही है।
ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक चली बस
पुलिस जांच के अनुसार 4 अगस्त को बस ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर इलाके की एक कार्यशाला से निकली थी। इसके बाद वह दिल्ली के उत्तरी हिस्से में स्थित तिमारपुर की ओर गई।
बस ने ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर का सफर किया। इस दौरान वह कई पुलिस जांच बिंदुओं से होकर गुजरी, लेकिन उसे रोका नहीं गया।
इसी दौरान बस में नाबालिग लड़की के साथ कथित अपराध होने की बात जांच में सामने आई है।
चालक और परिचालक पर आरोप
पुलिस के अनुसार नाबालिग लड़की ग्रेटर नोएडा के परी चौक इलाके में बस के पास पहुंची थी। वह नोएडा में अपने रिश्तेदार के घर जाने की कोशिश कर रही थी।
पुलिस का कहना है कि बस के चालक और परिचालक ने उसे बस में बैठने के लिए कहा। बाद में लड़की ने बस में कोई अन्य यात्री नहीं होने पर उतरने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि उसे उतरने नहीं दिया गया। इसके बाद बस दिल्ली की ओर बढ़ती रही।
पलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की आगे जांच की जा रही है।
चालकों और परिचालकों के सत्यापन पर भी सवाल
मामले की जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी चालक और परिचालक की नियुक्ति से पहले पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था।
जांच एजेंसियां अब बस सेवा संचालक से कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा जांच को लेकर पूछताछ कर रही हैं। यह सेवा कई बसें संचालित करती है।
इससे निजी यात्री बसों में कर्मचारियों की नियुक्ति और उनके पृष्ठभूमि सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं।
वाहन सुरक्षा व्यवस्था की होगी जांच
पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बस में अनिवार्य सुरक्षा उपकरण मौजूद थे या नहीं। इनमें वाहन की निगरानी करने वाली प्रणाली और आपातकालीन सहायता के लिए लगाए जाने वाले बटन शामिल हैं।
अगर ये व्यवस्थाएं बस में मौजूद थीं, तो जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि यात्रा के दौरान उनसे कोई आपात संकेत मिला था या नहीं।
पुलिस जांच में सामने आ रही कई खामियां
इस मामले में अब तक सामने आई जानकारियों से बस संचालन और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं। एक ओर बस पर पहले से कई चालान थे, वहीं दूसरी ओर उसके अंदर का सीसीटीवी काम नहीं कर रहा था।
इसके अलावा खिड़कियों पर मोटे पर्दे और कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन की कमी जैसी बातें भी जांच का हिस्सा बन गई हैं।
अब आगे क्या होगा?
पुलिस मामले में वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच भी आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों ने जैविक नमूनों की जांच जल्द कराने के लिए फोरेंसिक प्रयोगशाला से भी संपर्क किया है। मामले को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए अदालत में कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जांच का उद्देश्य न केवल कथित अपराध की पूरी सच्चाई सामने लाना है, बल्कि यह पता लगाना भी है कि बस को सुरक्षा नियमों में इतनी खामियों के बावजूद चलने की अनुमति कैसे मिली।
निष्कर्ष
दिल्ली बस दुष्कर्म मामला सिर्फ कथित अपराध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने निजी यात्री बसों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
11 चालान, खराब सीसीटीवी, खिड़कियों पर मोटे पर्दे और कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन की कमी जैसी जानकारियां सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियों की नजर उन सभी व्यवस्थाओं पर है, जिनकी मदद से ऐसी बसों को सड़क पर चलने की अनुमति मिलती है।
मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि सुरक्षा नियमों के पालन में कहां-कहां लापरवाही हुई और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।

