देश के बैंक कर्मचारी सप्ताह में दो दिन की अनिवार्य छुट्टी की मांग को लेकर 28 से 30 सितंबर तक तीन दिनों की देशव्यापी हड़ताल करने जा रहे हैं। इसके साथ ही वे प्रोडक्टिविटी लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) स्कीम को वापस लेने की भी मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि बैंक कर्मचारियों का स्वास्थ्य और जीवन गुणवत्ता सुधारना आवश्यक है, जिसके लिए सप्ताह में दो दिन की अनिवार्य छुट्टी अनिवार्य होनी चाहिए।
बैंक कर्मचारियों के वकीलों और संगठनों ने संयुक्त रूप से इस हड़ताल की योजना बनाई है। उनका तर्क है कि लगातार काम करते रहने से कर्मचारियों पर अत्यधिक दबाव बढ़ता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा, PLI स्कीम की वापसी की मांग इस आधार पर की गई है कि यह योजना कर्मचारियों के अधिकारों और दायित्वों के प्रति असंवेदनशील है।
इस तीन दिवसीय हड़ताल के कारण पूरे देश में बैंकिंग सेवाओं पर गहरा असर पड़ेगा। ग्राहक और व्यापारी इस दौरान बैंकिंग कार्यों में बाधा का सामना कर सकते हैं। बैंक यूनियनों ने सरकार और प्रबंधन से अपील की है कि वे कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करें ताकि सेवाओं में बाधा न आए और बैंकिंग क्षेत्र सुचारू रूप से काम करता रहे।
सरकारी अधिकारियों ने अभी इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। वहीं, बीते वर्षों में भी बैंक कर्मचारियों ने कई बार छुट्टी संबंधी सुधारों के लिए हड़ताल की है, लेकिन पूर्ण समाधान अभी तक नहीं निकला है। इस बार की हड़ताल को इसलिए गंभीरता से देखा जा रहा है क्योंकि इसमें व्यापक स्तर पर भागीदारी की संभावना जताई जा रही है।
बैंकिंग सेवाओं पर इस हड़ताल के प्रभाव को देखते हुए ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे आवश्यक वित्तीय काम पहले से निपटा लें। वहीं, बैंक यूनियनों ने भी हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाओं के संचालन का आश्वासन दिया है।
इस खबर से संबंधित आधिकारिक पत्र देखें →




