कुरुक्षेत्र के पवित्र ब्रह्म सरोवर में अमावस्या के पावन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु पूजा अर्चना और स्नान करने के लिए एकत्रित हुए। इस दिन विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
पंडित राकेश गोस्वामी, जो तीर्थ पुरोहित हैं, ने बताया कि ब्रह्म सरोवर भारत भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। अमावस्या के दिन यहां लोग पितरों की आत्मा को शांति देने के लिए पूजा करते हैं, जिसमें विशेष तौर पर अन्न और वस्त्र दान को पुन्यकारी माना जाता है।
उन्होंने आगे बताया कि महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्णा ने पांडवों और श्री धृतराष्ट्र के साथ यहीं पूजा-अर्चना करवाई थी। तभी से यह धार्मिक परंपरा यहां निरंतर जारी है। इसलिए हर साल हजारों श्रद्धालु देश के विभिन्न हिस्सों से यहां आकर पावन अनुष्ठान संपन्न करते हैं।
श्रद्धालु पवित्र सारोवर में डुबकी लगाकर अपने पितरों के कल्याण और शांति की कामना करते हैं। इस दिन की धार्मिक महत्ता के कारण ब्रह्म सरोवर का वातावरण गंगा-जमुना के संगम जैसा पवित्र और श्रद्धा से पूर्ण हो जाता है।
पंडित राकेश गोस्वामी ने लोगों को पितरों की आत्मा की शांति के लिए दान पुण्य करने और श्रेष्ठ अनुष्ठान संपन्न करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि इस दिन किये गए दान और पूजा के फल से पितरों को मुक्ति और शांति मिलती है, तथा वंश के लिए भी समृद्धि आती है।



