नई दिल्ली: वंदे मातरम को लेकर चल रही बहस अब बॉलीवुड तक पहुंच गई है। दिग्गज अभिनेता मुकेश खन्ना शर्मिला टैगोर के बयान पर खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने शर्मिला टैगोर के विचारों से असहमति जताते हुए सवाल उठाया कि आखिर वंदे मातरम को लेकर उनकी सोच ऐसी क्यों है।
शर्मिला टैगोर के बयान पर क्या बोले मुकेश खन्ना?
मुकेश खन्ना ने एक बातचीत के दौरान कहा कि शर्मिला टैगोर अपने नजरिए और समझ के आधार पर बात कर रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि दूसरे धर्मों को लेकर चिंताएं वंदे मातरम को देखने के नजरिए को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने शर्मिला टैगोर की शादी और उनके परिवार का जिक्र करते हुए उनके रुख पर सवाल खड़े किए। मुकेश खन्ना का कहना था कि शर्मिला बंगाली संस्कृति और हिंदू धार्मिक माहौल में पली-बढ़ी हैं, इसलिए उन्हें यह समझना चाहिए कि वंदे मातरम को लेकर लोगों की भावनाएं क्या हैं।
पटौदी परिवार में शादी का भी किया जिक्र
वंदे मातरम विवाद पर अपनी बात रखते हुए मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर की पटौदी परिवार में शादी का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या शादी के बाद उनके नजरिए में बदलाव आया।
हालांकि, ये बातें मुकेश खन्ना की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया और राय हैं। शर्मिला टैगोर के बयान को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
वंदे मातरम को लेकर क्यों हो रही है बहस?
वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है और इसका देश के स्वतंत्रता आंदोलन से ऐतिहासिक जुड़ाव रहा है। गीत के कुछ हिस्सों में धार्मिक प्रतीकों का उल्लेख होने के कारण लंबे समय से इसके पूरे पाठ को लेकर अलग-अलग मत सामने आते रहे हैं।
इसी संदर्भ में वंदे मातरम के अलग-अलग हिस्सों और इसके सार्वजनिक इस्तेमाल को लेकर बहस चल रही है। मुकेश खन्ना ने अपनी बातचीत में इस मुद्दे पर राष्ट्रीय और सांस्कृतिक भावना को प्राथमिकता देने की बात कही।
'मां तुझे सलाम' का भी दिया उदाहरण
मुकेश खन्ना ने अपनी बात समझाने के लिए ए.आर. रहमान के लोकप्रिय गीत 'मां तुझे सलाम' का उदाहरण भी दिया। उनका तर्क था कि देश को मां के रूप में संबोधित करने और उसके प्रति सम्मान जताने की भावना को धार्मिक नजरिए से अलग भी देखा जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले लोगों को देश और उसके राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए। हालांकि, उनके मुताबिक किसी व्यक्ति को शारीरिक रूप से झुकने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
मुकेश खन्ना पहले भी दे चुके हैं बयान
यह पहली बार नहीं है जब मुकेश खन्ना ने राष्ट्रीय प्रतीकों और उनसे जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी है। इससे पहले भी वह 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' को लेकर अपने विचार सार्वजनिक कर चुके हैं। अगस्त 2026 में उन्होंने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान बनाए जाने की मांग को लेकर भी बयान दिया था।
निष्कर्ष
मुकेश खन्ना शर्मिला टैगोर विवाद अब वंदे मातरम को लेकर चल रही व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है। मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर के विचारों पर सवाल उठाते हुए अपनी असहमति जाहिर की है। वहीं, यह मुद्दा राष्ट्रीय प्रतीकों, धार्मिक भावनाओं और व्यक्तिगत विचारों के बीच संतुलन को लेकर एक नई चर्चा को जन्म दे रहा है।


