रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए हैं ताकि वे आगामी ब्रिक्स समिट 2026 में भाग ले सकें। दिल्ली पहुंचने के बाद, पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच आज द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर चर्चा हो सकती है, जिनमें सुखोई फाइटर जेट, क्रूड ऑयल, और रक्षा साझेदारी शामिल हैं।
ब्रिक्स समिट में भारत और रूस समेत कई उभरती आर्थिक ताकतें हिस्सा लेती हैं। इस बैठक में दोनों देश वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाते हैं। पुतिन का भारत आना इन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और भी सुदृढ़ कर सकता है।
सुखोई फाइटर जेट पर चर्चा से रक्षा क्षेत्र में भारत-रूस सहयोग के नए अध्याय की संभावनाएं बढ़ रही हैं। इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल के आयात और निर्यात को लेकर भी बड़े समझौते हो सकते हैं, जिनका दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव पड़ेगा। ये मुद्दे दोनों नेतृत्व के लिए प्राथमिक होंगे।
रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र के समझौते न केवल भारत और रूस के बीच व्यापारिक संबंधों को विस्तार देंगे, बल्कि प्रौद्योगिकी साझेदारी में भी महत्वपूर्ण वृद्धि लाएंगे। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों को लाभ होगा।
इस बीच, भारत में भी इस बैठक को लेकर कूटनीतिक सक्रियता दिखाई जा रही है, क्योंकि यह बैठक वैश्विक शक्ति संतुलन में नया प्रभाव डाल सकती है। दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक को दुनिया की निगाहों से देखा जा रहा है, जहां उम्मीद है कि कई बड़े समझौते इस अवसर पर दर्ज होंगे।
यह ध्यान देने योग्य है कि पुतिन की यह यात्रा कई अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय मसलों को लेकर चर्चा का महत्वपूर्ण दौर है, जो ब्रिक्स समिट के पूर्व अपेक्षित है। इससे भारत और रूस के दाखे विश्व स्तर पर और मजबूती से स्थापित हो सकते हैं।


