रायपुर कलां स्थित गौशाला के संचालन को लेकर चंडीगढ़ नगर निगम ने नई पहल शुरू की है। नगर निगम ने इस गौशाला को चलाने के लिए इच्छुक धर्मार्थ संस्थाओं से आवेदन मांगे हैं। निगम ने इसके लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट यानी EOI जारी किया है। इसका मकसद गौशाला में मौजूद गोवंश को बेहतर चारा, इलाज और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
रायपुर कलां गौशाला में इस समय 700 से अधिक गायें हैं। निगम ने इसके संचालन के लिए कई शर्तें तय की हैं, ताकि पशुओं की देखभाल में किसी तरह की लापरवाही न हो।
गौशाला की पूरी जिम्मेदारी चयनित संस्था की होगी
नगर निगम के अनुसार जिस संस्था का चयन किया जाएगा, उसे गौशाला के संचालन और रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी उठानी होगी।
इसमें गोवंश के लिए चारा उपलब्ध कराना, पशु चिकित्सा की व्यवस्था करना, सफाई और स्वच्छता बनाए रखना, सुरक्षा व्यवस्था देखना और पूरे परिसर का प्रबंधन शामिल है।
संस्था को आवारा या नगर निगम द्वारा पकड़े गए गोवंश की देखभाल भी करनी होगी।
चारा और दवाइयों का खर्च संस्था उठाएगी
EOI में यह स्पष्ट किया गया है कि चयनित एजेंसी को गोवंश के लिए चारा और दवाइयों की व्यवस्था अपने खर्च पर करनी होगी
चारे की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान देना होगा। पशुओं को उनकी जरूरत के अनुसार पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराना संस्था की जिम्मेदारी होगी।
पानी और पशु चिकित्सा पर विशेष जोर
गौशाला में साफ और ताजा पीने का पानी उपलब्ध कराना जरूरी होगा। इसके अलावा जरूरत के अनुसार पशु चिकित्सकों और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होगी।
नगर निगम ने इन व्यवस्थाओं को लेकर सख्त नियम बनाए हैं, ताकि गौशाला में रहने वाले पशुओं के स्वास्थ्य से समझौता न हो।
लापरवाही पर लगेगा जुर्माना
नगर निगम ने गौशाला के संचालन में लापरवाही रोकने के लिए जुर्माने का प्रावधान भी रखा है।
अगर समय पर गायों को खाना नहीं दिया जाता, साफ पानी उपलब्ध नहीं कराया जाता, पशु चिकित्सा की सुविधा नहीं दी जाती या पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था नहीं होती, तो 1,500 से 2,500 रुपये प्रतिदिन तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इससे साफ है कि निगम चयनित संस्था की कार्यप्रणाली पर नजर रखना चाहता है।
बिजली और पानी का खर्च नगर निगम देगा
गौशाला के संचालन का ज्यादातर खर्च चयनित संस्था को खुद उठाना होगा। हालांकि चंडीगढ़ नगर निगम बिजली और पानी के शुल्क की प्रतिपूर्ति करेगा।
बाकी जरूरी खर्च, जिसमें चारा, दवाइयां और संचालन से जुड़े अन्य खर्च शामिल हैं, संस्था को स्वयं वहन करने होंगे।
गौशाला में बन रहा पशु अस्पताल
रायपुर कलां की गौशाला में पशुओं के इलाज के लिए पशु अस्पताल का निर्माण भी चल रहा है। यह सुविधा गोवंश को बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने में मदद कर सकती है। गौशाला में पर्याप्त पशु चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराना EOI की प्रमुख शर्तों में शामिल है।
संस्थाओं के लिए क्या है चुनौती?
गौशाला में 700 से अधिक पशु होने के कारण इसका संचालन आसान जिम्मेदारी नहीं है। रोजाना पर्याप्त मात्रा में चारा, पानी और दवाइयों की व्यवस्था करनी होगी।
इसके साथ ही सफाई, सुरक्षा और कर्मचारियों की उपलब्धता पर भी लगातार ध्यान देना होगा। इसलिए संस्था को पर्याप्त संसाधनों और कर्मचारियों के साथ काम करना होगा।
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाया आर्थिक मदद का मुद्दा
सामाजिक कार्यकर्ता आरके गर्ग ने कहा कि नगर निगम को गौशालाओं का संचालन करने वाली गैर-सरकारी संस्थाओं को आर्थिक सहायता देनी चाहिए।
उनका कहना है कि अलग-अलग गौशालाओं को मिलने वाली मदद में एकरूपता नहीं है। उनका यह भी कहना है कि वित्तीय सहायता की कमी के कारण कई संस्थाएं गौशाला संचालन के लिए आगे नहीं आतीं।
चंडीगढ़ में गौशालाओं के संचालन की चुनौती
नगर निगम पहले से शहर में कई गौशालाओं का संचालन करता है। इनमें इंडस्ट्रियल एरिया, मलोया, रायपुर कलां और सेक्टर 45 व सेक्टर 25 की गौशालाएं शामिल हैं।
रायपुर कलां की गौशाला के संचालन की जिम्मेदारी किसी बाहरी संस्था को देने का उद्देश्य प्रबंधन और पशुओं की देखभाल को बेहतर बनाना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
शहरों में आवारा गोवंश की समस्या लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखना, भोजन उपलब्ध कराना और इलाज की व्यवस्था करना जरूरी है। ऐसे में अगर रायपुर कलां गौशाला का संचालन बेहतर तरीके से होता है, तो इससे नगर निगम की पशु प्रबंधन व्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
आगे क्या होगा?
अब इच्छुक संस्थाओं से मिलने वाले आवेदनों के आधार पर चयन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। चयनित संस्था को नगर निगम द्वारा तय नियमों के अनुसार गौशाला का संचालन करना होगा।
निगम की शर्तों में पशुओं के भोजन, पानी, इलाज, सफाई, सुरक्षा और पर्याप्त स्टाफ पर विशेष जोर दिया गया है।
निष्कर्ष
चंडीगढ़ नगर निगम ने रायपुर कलां गौशाला के बेहतर संचालन के लिए इच्छुक संस्थाओं से आवेदन मांगे हैं। 700 से अधिक गोवंश वाली इस गौशाला की जिम्मेदारी चयनित संस्था को अपने खर्च पर संभालनी होगी।
चारा, दवाइयां, सफाई, सुरक्षा और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाओं की जिम्मेदारी संस्था की होगी, जबकि बिजली और पानी के शुल्क की प्रतिपूर्ति नगर निगम करेगा। नियमों का पालन नहीं करने पर प्रतिदिन 1,500 से 2,500 रुपये तक जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
इस कदम का मुख्य उद्देश्य गौशाला के प्रबंधन को व्यवस्थित करना और वहां रहने वाले गोवंश को बेहतर देखभाल उपलब्ध कराना है।


