दादा लख्मी चंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ परफॉर्मिंग एंड विजुअल आर्ट्स (डीएलसीसुपवा), रोहतक के एक्टिंग कोर्स के तीसरे सेमेस्टर के 11 छात्रों ने 30 दिनों की वर्कशॉप में सीखी बॉडी लैंग्वेज और शारीरिक अभिव्यक्ति की कला। इस अवधि के दौरान, छात्रों ने अभिनय के साथ-साथ शरीर की फिटनेस, संतुलन, अनुशासन, आत्मविश्वास और प्रभावशाली शारीरिक भाषा के महत्व को समझा और अभ्यास किया।
एफटीवी बिल्डिंग स्थित एक्टिंग स्टूडियो में आयोजित बॉडी कल्चर डेमोस्ट्रेशन कार्यक्रम में छात्रों ने सामूहिक प्रस्तुतियां दीं, जिस दौरान उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों तथा किरदारों के अनुसार शरीर की मुद्रा, चाल-ढाल और हाव-भाव को बदलने की अपनी क्षमताओं का परिचय दिया। इस प्रस्तुति का मार्गदर्शन एक्टर एवं थिएटर प्रैक्टिशनर प्रेरणा जोशी ने किया, जिन्होंने प्रोफेशनल एक्सपर्ट के रूप में छात्रों को निर्देशित किया था।
कार्यक्रम में मौजूद रजिस्ट्रार डॉ. गुंजन मलिक मनोचा तथा अन्य सुपवा परिवार के सदस्य और छात्र भी इस कला प्रदर्शन का आनंद लेते हुए छात्रों की मेहनत की प्रशंसा की। छात्रों ने उपस्थित दर्शकों को बताया कि अभिनय केवल संवाद बोलने या चेहरे के भाव तक सीमित नहीं होता बल्कि पूरे शरीर के माध्यम से अभिव्यक्ति की जाती है। शारीरिक रूप से फिट और सक्रिय रहना किसी भी अभिनेता के लिए आवश्यक है।
छात्रों ने कहा कि 30 दिन की कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने जो कौशल सीखा है, उसका यह पहला सार्वजनिक प्रदर्शन था। नियमित शारीरिक अभ्यास से न केवल उनकी फिटनेस में सुधार हुआ है बल्कि उनका आत्मविश्वास और किरदार की प्रस्तुति भी अधिक प्रभावशाली हुई है। इस डेमोस्ट्रेशन ने यह स्पष्ट कर दिया कि शरीर पर नियंत्रण और शारीरिक भाषा की समझ एक उत्कृष्ट अभिनेता बनने के लिए अनिवार्य है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से डीएलसीसुपवा के छात्रों ने इस बात पर जोर दिया कि अभिनय कला में शारीरिक भाषा का अभ्यास और अनुशासन अभिनेताओं की सबसे महत्वपूर्ण क्षमताओं में से एक होती है, जो दर्शकों के साथ संवाद स्थापित करने में मदद करती है।
इस प्रकार, डीएलसीसुपवा में जारी यह वर्कशॉप और डेमोस्ट्रेशन छात्रों के प्रशिक्षण तथा उनके कलात्मक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई है।




