हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के शाहबाद क्षेत्र में धान की सरकारी खरीद को तत्काल शुरू करने की मांग को लेकर किसानों का आन्दोलन गंभीर रूप ले चुका है। यह आन्दोलन मुख्य रूप से भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के नेतृत्व में चलाया जा रहा है, जिसमें किसानों ने धान की खरीद में होने वाली देरी और उसके प्रभावों के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 (दिल्ली-चंडीगढ़ जीटी रोड) को जाम करने का प्रयास किया।
किसानों का कहना है कि सामान्य रूप से हर वर्ष धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होती है, लेकिन इस वर्ष अगेती धान की किस्म पहले से ही मंडियों में 8 से 10 लाख क्विंटल तक पहुंच चुकी है। किसानों का डर है कि देरी की वजह से उनकी फसल खराब हो सकती है या फिर उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,441 रुपये प्रति क्विंटल से कम मूल्य पर निजी व्यापारियों को बेचना पड़ेगा। इसी चिंता के चलते किसानों ने तत्काल धान की खरीद शुरू करने की मांग की है।
हालांकि प्रशासन ने 25 सितंबर से खरीद प्रक्रिया प्रारंभ करने का लिखित भरोसा दिया है, लेकिन किसान इसे तत्काल प्रभाव से शुरू करने पर अड़े हुए हैं। पुलिस ने किसानों की जाम की कोशिश को रोकने के लिए पानी की बौछारें (वॉटर कैनन) और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।
पुलिस और किसानों के बीच हुई इस टकराव के बाद किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग छोड़कर शाहबाद-बरारा स्टेट हाईवे पर रात बिताई, जहां वे अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
इस गतिरोध के बीच आज शाहबाद में एक बड़ी किसान महापंचायत बुलाई गई है, जिसमें आंदोलन के भविष्य और आगे के रणनीति पर चर्चा होगी। इस महापंचायत के निर्णय से आगामी दिनों में आंदोलन की दिशा तय होगी।
यातायात के लिहाज़ से भी इस आंदोलन का प्रभाव पड़ा है। नेशनल हाईवे-44 और शाहबाद के अन्दरूनी मार्गों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिससे दिल्ली-चंडीगढ़ मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। यात्रियों को मार्ग में व्यवधानों का सामना करना पड़ सकता है।
शाहबाद के किसानों का यह आन्दोलन कृषि और न्यूनतम समर्थन मूल्य नीति से जुड़ी व्यापक सामाजिक-आर्थिक जटिलताओं को प्रदर्शित करता है। किसान अपने उत्पादों को उचित मूल्य पर बेचने के लिए संघर्षरत हैं, जबकि सरकारी खरीद में देरी उनकी आर्थिक सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।
सरकार और जिला प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान अभी तक स्पष्ट रूप से नहीं आया है, लेकिन किसानों की मांग जल्द सुनवाई की अपेक्षा है। आगे के अपडेट के लिए किसानों के महापंचायत के निर्णय और प्रशासन के बयान से स्थिति स्पष्ट होगी।
यह आन्दोलन प्रदेश के किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, जिसके परिणाम अन्य हिस्सों के किसानों को भी प्रभावित कर सकते हैं। स्थिति की निगरानी जारी है।



