रोहतक, 12 सितंबर। पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय एवं पीजीआईएमएस रोहतक ने प्रदेश में क्लबफुट से पीड़ित बच्चों को सामान्य जीवन प्रदान करने के लिए एक बड़ी मुहिम का नेतृत्व किया है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है कि जन्म से टेढ़े पैर लेकर पैदा होने वाले किसी भी बच्चे का भविष्य अंधकारमय न हो और वे समाज के पूर्ण सदस्य बन सकें। पीजीआईएमएस के लेक्चर थियेटर 1 में आयोजित 174वीं रिफ्रेशर ट्रेनिंग पर कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि देश में कोई भी बच्चा क्लबफुट की वजह से दिव्यांगता से ग्रस्त न रहे। उन्होंने इस कार्यक्रम को केवल एक अकादमिक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि हजारों बच्चों के जीवन संवारने का एक मानवीय अभियान बताया।
कुलपति डॉ. अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा का सबसे बड़ा धर्म मानवता की सेवा है और यदि उचित समय पर उपचार मिल जाए तो जन्मजात टेढ़े पैर की विकृति को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है। इससे सिर्फ पैर या हाथ नहीं सुधरते, बल्कि एक बच्चे के जीवन, आत्मविश्वास और उसके परिवार की उम्मीदों को नया स्वरूप मिलता है। पीजीआईएमएस का उद्देश्य न केवल बड़े ऑपरेशन करना है, बल्कि प्रशिक्षित और संवेदनशील चिकित्सकों को तैयार करना है जो समाज के अंतिम कोने तक जाकर जरूरतमंद बच्चों को निःशुल्क व विश्वस्तरीय उपचार दे सकें।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव और हड्डी रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. रूप सिंह ने बताया कि पीजीआईएमएस और क्योर इंडिया इंटरनेशनल ट्रस्ट के बीच 13 वर्षों से सहयोग जारी है। 2013 में पहली बार दोनों संस्थानों के बीच समझौता हुआ था, तब से हरियाणा में 528 से अधिक बच्चों का सफल उपचार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में छह विशेष क्लबफुट केंद्र कार्यरत हैं, जहां पोंसेटी पद्धति के तहत निःशुल्क उपचार होता है। क्लबफुट की विकृति में बच्चे का पैर अंदर और नीचे की ओर मुड़ा होता है, जिसका इलाज जन्म के शुरुआती हफ्तों में विशेष प्लास्टर लगाने से किया जाता है, साथ ही दोषपूर्ण नस की एक छोटी प्रक्रिया के बाद विशेष जूते पहनाए जाते हैं। इससे कई मामलों में बड़े ऑपरेशन से बचा जा सकता है।
पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने क्योर इंडिया के कार्यों की प्रशंसा की और कहा कि यह संस्था निर्धन परिवारों के बच्चों को विश्वसनीय इलाज दे रही है। डॉक्टर मैथ्यू वर्गीज, जो क्योर इंडिया के मेडिकल डायरेक्टर हैं, ने बताया कि 2009 से शुरू हुए इस अभियान के तहत भारत के 29 राज्यों के 262 जिलों में 441 क्लबफुट क्लीनिक स्थापित किए गए हैं, जिनसे दिसंबर 2024 तक एक लाख 12 हजार से अधिक बच्चों का निःशुल्क इलाज हो चुका है। वे उल्लेख करते हैं कि देश में प्रतिदिन लगभग 150 बच्चे क्लबफुट के साथ जन्म लेते हैं, इसलिए हर जिले में क्लबफुट क्लीनिक आवश्यक है ताकि माताएं अपने बच्चों के इलाज के लिए दूर न जाएं। अब तक 137 राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से नौ हजार से अधिक चिकित्सक प्रशिक्षित किए जा चुके हैं और चार लाख 24 हजार से अधिक विशेष ब्रेस वितरण किए गए हैं।
कार्यक्रम के आयोजन में शामिल चिकित्सा विशेषज्ञों ने कहा कि पीजीआईएमएस में प्रति सोमवार, वीरवार और शनिवार इन बच्चों को प्लास्टर लगाकर बिना ऑपरेशन के पैर सीधा किया जा रहा है। इस सक्रिय अभियान के माध्यम से प्रदेश और देश के हजारों बच्चे नए जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. उमेश यादव ने किया, जबकि डॉ. आशीष देवगन ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अवसर पर कई चिकित्सक, पीजी विद्यार्थी और क्योर इंडिया के निदेशक भी मौजूद थे।




