रोहतक में पाखंड और अंधविश्वास के खिलाफ आर्य समाज द्वारा आयोजित संगोष्ठी में प्रदेशभर की सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, आर्य समाज के पदाधिकारी और अन्य सदस्य शामिल हुए। इस संगोष्ठी में पाखंड के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और अभियान तेज करने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में सात प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की गई, जिनका उद्देश्य समाज में सही सोच को प्रोत्साहित करना और अंधविश्वास से लड़ना था।
संगोष्ठी में रामपाल के खिलाफ भी एकजुट आवाज़ उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी सह्य नहीं की जाएगी और सरकार से रामपाल की जमानत अर्जी को खारिज करने की मांग की गई। उन्होंने यह भी कहा कि रामपाल के समर्थकों द्वारा सोशल मीडिया पर हथियार दिखाकर धमकियां दी जा रही हैं, जिस पर पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और आरोपियों को गिरफ्तार करना आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त, वक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उपयोग कर देवी-देवताओं और महापुरुषों की फोटो में छेड़छाड़ करने की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की और सरकार से ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर मुकदमा दर्ज करने का आग्रह किया।
आर्य समाज ने इस आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए खाप पंचायतों और ग्राम पंचायत के सरपंचों से संपर्क स्थापित किया है, ताकि पाखंड के खिलाफ सामूहिक स्वर उठाया जा सके। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाली और समाज में तनाव पैदा करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। इस प्रकार की घटनाओं से सामाजिक एकता प्रभावित होती है और देश में शांति बाधित होती है।
संगोष्ठी के समापन पर यह संकल्प लिया गया कि वे अपने स्तर पर समाज को शिक्षित कर पाखंड और अंधविश्वास के खिलाफ निरंतर काम करेंगे। समाज के सभी वर्गों को एकजुट कर सामूहिक चेतना बढ़ाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। इस प्रकार की पहल से सांस्कृतिक और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा मिलेगा तथा समाज में वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहन मिलेगा।




