हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में लंपी स्किन डिजीज (Lumpy Skin Disease) का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान हो रहा है। यह बीमारी मुख्यतः गायों को प्रभावित करती है और इसके कारण संक्रमित पशुओं की मौत भी हो रही है।
हरियाणा में लंपी वायरस का प्रभाव हरियाणा पशु पालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अभी तक राज्य में कुल 7,577 से अधिक गाय एवं अन्य गोवंश लंपी वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से 6,135 संक्रमित पशु शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मिले हैं, जबकि 1,442 पशु गौशालाओं में संक्रमित पाए गए हैं। इस बीमारी के कारण अब तक 70 गायों की मौत हो चुकी है। वर्ष 2022 में भी प्रदेश में 2,937 पशु मरे थे, जिनमें 2,929 गायें और 8 भैंसें शामिल थीं।
पशुपालन विभाग ने बताया कि इंफेक्टेड पशुओं की अंतरराज्यीय आवाजाही से बीमारी के फैलने में तेजी आई है। इसी कारण पशुओं की अन्य राज्यों से आवाजाही पर फिलहाल प्रतिबंध लागू किए गए हैं। पशु मेलों पर रोक और नए पशुओं को झुंड में शामिल करने से पहले 15 दिन की क्वारंटाइन व्यवस्था को अनिवार्य भी किया गया है।
उत्तर प्रदेश में भी लंपी वायरस का प्रकोप उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर व जौनपुर सहित कई इलाकों में भी लंपी स्किन डिजीज का गंभीर प्रकोप देखा गया है, जहां कई पशुओं की मौत हुई है। यहां के पशुपालन विभाग ने टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है और निगरानी बढ़ाने के आदेश दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में विशेष ध्यान रखकर पशु सुरक्षा एवं स्वस्थ भारत मिशन के तहत काम किया जा रहा है।
लंपी वायरस के लक्षण और प्रभाव लंपी स्किन डिजीज के प्रमुख लक्षणों में पशु के शरीर पर गोल-गोल गांठे या उभरे हुए घाव दिखाई देना शामिल है। इसके अतिरिक्त तेज बुखार, आंखों और नाक से स्राव या पानी आना, सुस्ती, खाने-पीने कम करना, दूध उत्पादन में कमी आना, पैरों में सूजन और चलने में कठिनाई इस बीमारी के सामान्य लक्षण होते हैं।
पशुपालकों के लिए सावधानी पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को आवश्यक सावधानियां बरतने की सलाह दी है। जैसे कि बीमारी के लक्षण दिखने पर संक्रमित पशु को तुरंत बाकी पशुओं से अलग कर क्वारंटाइन करना, पशुशाला की सफाई का विशेष ध्यान रखना और बिना देरी पशु चिकित्सक से संपर्क कर टीकाकरण करना। गो पॉक्स या एलएसडी का टीका लगवाना भी सुरक्षित माना जाता है।
सरकार की कार्रवाइयां दोनों राज्यों में पशुओं के संक्रमण को रोकने के लिए सरकारी प्रयास सक्रिय हैं। पशुओं के अंतरराज्यीय आवागमन पर रोक लगाने के साथ ही पशु मेलों को निरस्त किया जा रहा है। टीकाकरण एवं निगरानी को बढ़ावा दिया गया है ताकि ग्रामीण इलाकों में यह बीमारी फैलने से रोकी जा सके। पशुपालकों को भी जागरूक करने की मुहिम चल रही है ताकि वे बीमारी के लक्षणों को समझ सकें और प्रभावी रोकथाम कर सकें।
अंतरराज्यीय पशु आवाजाही पर प्रतिबंध और क्वारंटाइन व्यवस्था से बीमारी के प्रसार को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही पशुपालन विभाग का मानना है कि सतर्कता और समय रहते इलाज इस बीमारी से बचाव के लिए अति आवश्यक है।





